समानता शब्द से आप क्या समझते हैं? राजनैतिक समानता तथा सामाजिक समानता में अंतर स्पष्ट कीजिए – Sab Sikho

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आज के इस पोस्ट में हम जानेंगे समानता शब्द होता क्या है और राजनीतिक समानता तथा सामाजिक समानता में क्या क्या अंतर है इसे विस्तार से बताया गया है तो आप जरूर पढ़ें।

समानता शब्द से अभिप्राय – राजनैतिक समानता तथा सामाजिक समानता

समानता शब्द से आप क्या समझते हैं?

समानता का अर्थ (Meaning of Equality)- समानता का अर्थ दो रूपों द्वारा स्पष्ट किया जा सकता है –

(i) समानता का संकुचित अर्थ (Narrower Meaning of Equality)- समानता के संकुचित अर्थ में समानता का अर्थ पूर्ण रूप से बराबरी से लिया जाता है। समानता के अर्थ में इस बात को विशेष महत्व दिया गया है कि सभी व्यक्तियों को समान सुविधाएं प्राप्त होना चाहिए, क्योंकि प्रकृति ने सभी को एक समान बनाया है।

फ्रांस की 1789 की क्रांति में कहा गया था, “सभी मनुष्य स्वतंत्र व समान पैदा हुए हैं. इसलिए वे अपने अधिकारों के बारे में भी स्वतंत्र तथा समान है।” (“Men are born and always continue to be free and equal in respect of their rights.”)

अमेरिकन स्वतंत्रता के घोषणा पत्र में भी कहा गया था. “हम इस सत्य को प्रमाणिक समझते हैं कि सब मनुष्य समान बनाए गए हैं।” (“We hold these truths to be self-evident that all men are born equal.”) समानता के संकुचित अर्थ से समानता के सही अर्थ का ज्ञान नहीं होता, क्योंकि प्रकृति ने सबको समान रूप नहीं दिया है। प्रकृति ने स्वयं व्यक्तियों को बुद्धि, रूप, शक्ति, स्वरूप आदि में भिन्न-भिन्न बनाया है।

(ii) समानता का व्यापक अर्थ (Broader Meaning of Equality)- समानता का व्यापक अर्थ यह है कि किसी भी व्यक्ति को कोई भी विशेष अधिकार प्राप्त न हो तथा सबके अधिकार एक समान हो।

लास्की ने समानता के विषय में लिखा है, “समानता का अर्थ यह नहीं है कि प्रत्येक व्यक्ति के साथ एक जैसा व्यवहार हो अथवा प्रत्येक व्यक्ति का समान वेतन हो । यदि ईट ढोने वाले का वेतन एक गणितज्ञ या वैज्ञानिक के समान कर दिया जाए तो समाज का उद्देश्य ही नष्ट हो जाएगा। इसलिए समानता का अर्थ एक और विशेष अधिकार का अभाव ओर दूसरी और सबको समान अवसर प्रदान करता है।”

समानता के मार्क्सवादी दृष्टिकोण की व्याख्या

समानता का मार्क्सवादी दृष्टिकोण – मार्क्सवादी तथा समाजवादी सभी प्रकार की असमानताओं की आलोचना करते हैं। वस्तुतः असमानता की शक्तियां कुछ धनी लोगों के हाथ में केन्द्रित हो जाती है। मार्क्सवादी आर्थिक समानता पर अधिक जोर देते हैं। उनके अनुसार धनी लोगों को अधिकांश लोगों का भाग्य विधाता नहीं होना चाहिए।

कुछ समाजवादी देश की पूरी सम्पति का राष्ट्रीयकरण चाहते हैं, अन्य उसका विरोध करते हैं। राष्ट्रीयकरण के विरोधियों का कहना है कि उससे नौकरशाही का प्रभाव बढ़ जाता है। ऐसी स्थिति में नौकरशाही धनी लोगों का स्थान ले लेती है। मार्क्सवादी आर्थिक शक्ति के साथ राजनीतिक शक्ति के विकेन्द्रीकरण पर बल देते हैं। इससे समानता में पर्याप्त वृद्धि होगी।

कानून के समक्ष समानता से आप क्या समझते हैं?

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 में इस सिद्धांत का उल्लेख है। यहां कहा गया है कानून के समक्ष सभी समान होंगे और कानून सबकी समान रूप से रक्षा करेगा। कानून सभी नागरिकों से ऊपर है और इसके सामने कोई छोटा-बड़ा नहीं है। कानून सबको समान समझता है और सब पर समान रूप से लागू होता है।

कानून गरीब-अमीर, ऊंच-नीच, शिक्षित-अशिक्षित आदि में कोई भेदभाव नहीं करता है। अंग्रेजों ने भारत में रहनेवाले सभी भारतीयं के लिए यह व्यवस्था थी कि कानून की दृष्टि में वे सभी समान होंगे और उनमें किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जाएगा। जाति, धर्म, भाषा व रंग आदि के आधार पर कानून भेदभाव नहीं करेगा ।

समाज के सभी वर्गों पर समान कानून लागू किए गए और इन कानूनों को उल्लंघन करनेवालों को, चाहे वे किसी भी वर्ग के हों, समान दण्ड की व्यवस्था की। यहां यह बात ध्यान रखने की है कि भारतीयों व यूरोपवासियों के लिए न केवल अलग-अलग कानून थे बल्कि न्यायालय भी अलग-अलग थे। इतना ही नहीं, केवल गोरे न्यायाधीश ही यूरोपवासियों का न्याय कर सकते थे। भारतीय न्यायाधीशों के अधिकार क्षेत्र से उन्हें बाहर रखा गया था।

इस प्रकार भारतवासियों के मन पर यह निरतन्तर चोट की जाती रही कि वे गुलाम हैं और उन्हें अपने स्वामी अंग्रेजों की बराबरी नहीं करने दी जा सकती। ब्रिटिश न्याय व्यवस्था ने भारतवासियों के लिए अनेक कठिनाइयां खड़ी कर दी। यह न्याय अत्यंत महंगा था। वकीलों व कचहरी की फीस और गवाहों पर होनेवाला खर्च इतना अधिक था कि सामान्य व्यक्ति के लिए न्याय मांगना असम्वव हो गया ।

दूसरे, न्याय व्यवस्था तथा कानून इतने जटिल थे कि सामान्य लोगों की समझ से बाहर थे। वे न्याय प्राप्त करने के लिए दर-दर की ठोकरें खाते थे तथा वकीलों व गवाहों की दया पर आश्रित रहते थे। गवाहों पर आधारित होने के कारण वकील मुकदमें को किसी भी दिशा में मोड़ सकते थे।

तीसरे, न्याय प्रक्रिया इतना धीमा था कि न्याय प्राप्त करने की इच्छा ही समाप्त हो जाती थी। लम्बे समय तक मुकदमा लड़कर न्याय प्राप्त करने की भारत के लोगों में न तो क्षमता थी और न धैर्य। इस प्रकार ब्रिटिश न्याय व्यवस्था ने ब्रिटिश हितों को सब प्रकार की सहायता प्रदान की।

राजनैतिक समानता तथा सामाजिक समानता में अंतर

राजनैतिक समानता तथा सामाजिक समानता में अंतर-

(1) राजनैतिक समानता (Political Equality)- राजनैतिक समानता का अर्थ है कि सभी नागरिकों को बिना किसी भेदभाव के शासन के कार्यों में समान अधिकार प्राप्त हों। समान राजनैतिक अधिकार राजनैतिक समानता की आधारशिला है। प्रजातंत्र सरकारों की स्थापना से पूर्व राजनैतिक समानता का कोई महत्व नहीं था।

जैसे-जैसे प्रजातंत्र का प्रचलन होता गया राजनैतिक समानता का कोई महत्व नहीं था। जैसे-जैसे प्रजातंत्र का प्रचलन होता गया । राजनैतिक अधिकारों के साथ-साथ राजनैतिक समानता की भी मांग बढ़ती गई। प्रजातंत्र में सरकारें इस सिद्धांत पर आधारित हैं कि राजनैतिक सत्ता अन्ततः जनता में निहित होती है।

अतः नागरिकों को शासन के कार्यों में भाग लेने का समान अधिकार प्रदान किया जाना चाहिए। राजनैतिक सत्ता के प्रयोग के लिए नागरिकों को सामान्यतः चार अधिकार प्रदान किए जाते हैं- मतदान का अधिकार, चुनाव में खड़े होने का अधिकार, सार्वजनिक पद ग्रहण करने का अधिकार तथा विरोध करने का अधिकार।

(2) सामाजिक समानता (Social Equality)- सामाजिक समानता का अर्थ है कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को समाज में समान समझा जाना चाहिए। प्रत्येक व्यक्ति समाज का बराबर का अंग है और सभी को समान सुविधाएं प्राप्त होनी चाहिए। किसी व्यक्ति से धर्म, जाति, रंग लिंग, धन आदि के आधार पर भेदभाव न हो ।

भारत में जात-पांत के आधार पर भेद किया जाता था। भारत सरकार ने कानून द्वारा छुआछूत को समाप्त कर दिया है । दक्षिण अफ्रीका में रंग के आधार पर काले तथा गोरे लोगों में भेद किया जाता है अत: दक्षिण अफ्रिका में सामाजिक समानता नहीं है ।

अमेरिका में काले तथा गोरे लोगों में भेद किया जाता है। काले लोगों को कई क्लबों में जाने नहीं दिया जाता और स्कूलों में भी उनके साथ अच्छा बर्ताव नहीं किया जाता।

मुझे उम्मीद है कि आप लोगों को राजनैतिक समानता तथा सामाजिक समानता की जानकारी अच्छी लगी है जिसमें मैंने समानता शब्द के बारे बताया है और राजनीतिक समानता तथा सामाजिक समानता में अंतर को भी विस्तार से बताया है। उम्मीद करता हूं कि यह पोस्ट आप लोगों को अच्छी लगी तो इसे शेयर जरूर करें और नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके और भी इसी तरह के पोस्ट को पढ़ सकते हैं, बहुत-बहुत धन्यवाद।

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